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जंगल की सुरक्षा में ‘सेंध’ या अफसरों की जेब गरम? रतनपुर वन परिक्षेत्र में कागजों पर चमकी फेंसिंग, भ्रष्ट बीट गार्ड और लापरवाह ड्यूटी रेंजर पर मेहरबानी क्यों?

जीशान अंसारी, बेलगहना/बिलासपुर : बिलासपुर वनमण्डल के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्र रतनपुर से भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के खुलेआम दुरुपयोग का एक बेहद संगीन मामला प्रकाश में आया है। यहाँ आमामुड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 2538 में RDF (Revisited Degrading Forest) मद के तहत कराए गए फेंसिंग तार घेराव निर्माण कार्य में नियमों को ताक पर रखकर भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। ​हरियाली को सहेजने और वनों के संरक्षण के लिए आने वाली सरकारी राशि को अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारियों ने मिलकर अपनी जेबें गर्म करने का जरिया बना लिया है।

​रेंजर को सब मालूम है, फिर भी मौन क्यों :-

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​इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और संदेहास्पद पहलू रतनपुर वनपरिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) की भूमिका को लेकर है। सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इस महाघोटाले की पूरी कुंडली और जमीनी हकीकत की जानकारी रेंजर साहब के संज्ञान में है। इसके बावजूद, अब तक न तो मौके पर किसी प्रकार की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई गई है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है। ​आखिर भ्रष्ट बीट गार्ड और अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने वाले ड्यूटी रेंजर पर विभाग इस कदर मेहरबान क्यों है? इस रहस्यमयी खामोशी ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

जमीन पर सिर्फ खानापूर्ति, कागजों में चमचमा रही फेंसिंग :- 

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​RDF मद का मुख्य उद्देश्य उजड़ते वनों को दोबारा हरा-भरा करना और फेंसिंग के जरिए मवेशियों व अतिक्रमणकारियों से उनकी रक्षा करना है। लेकिन आमामुड़ा बीट में फेंसिंग के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई है। घटिया स्तर के पोल और कमजोर तारों का इस्तेमाल कर लाखों रुपयों की हेराफेरी की बू साफ आ रही है। स्थिति यह है कि निर्माण कार्य पूरा होते ही इसकी कलई खुलने लगी है। ​ग्रामीणों ने कहा “हमने इस भ्रष्टाचार की शिकायत मौके पर साक्ष्य के साथ की थी, लेकिन हमारी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। रेंजर और बीट गार्ड की जुगलबंदी से ऐसा लगता है कि यहाँ जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की रस्म अदायगी की तैयारी है।”

​उच्च स्तरीय जांच की दरकार :- 

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​यदि बिलासपुर वनमण्डल के उच्चाधिकारी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप नहीं करते हैं, तो रक्षकों द्वारा ही भक्षकों की तरह जंगलों को खोखला करने का यह खेल बदस्तूर जारी रहेगा। सजग नागरिकों ने मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय टीम से कराई जाए, ताकि इस ‘मलाई तंत्र’ के सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सके और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग किए है

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